मुखपृष्ठ
गैलरी
डाउनलोड
हमारी मॉग

 

राज्य कर्मचारी अधिकार मंच ने आज उच्च न्यायालय के आदेष के बाद षीर्श पदाधिकारियों की बैठक कर न्यायालय के आदेष का पूर्णतः सम्मान करते हुए हड़ताल को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। बैठक में उपस्थित सदस्यों को न्यायालय की ओर से मिले आदेष के क्रम में मंच के अध्यक्ष हरि किषोर तिवारी और अजय सिंह ने संयुक्त रूप से कहा कि कर्मचारी समाज और नियोक्ता के बीच अभिभाडाउनलोडवक और पुत्र का सम्बन्ध होता है। ऐसे में अगर बार-बार न्यायालय को इन दोनों की समस्याओं में दखलदांजी करते हुए आदेष करना पड़े तो यह किसी भी सूरत में ठीक नही है। ऐसे में लगता है कि सरकार और कर्मचारियों के बीच कहीं न कहीं विष्वास की कमी है। उच्च अधिकारियों द्वारा कर्मचारियों की जायज समस्याओं पर भी निर्णय न लेने के कारण उत्तर प्रदेष में यह स्थिति सम्भवतः पहली बार निर्मित हुई है कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा 22 नवम्बर को आदेष पारित हुये तथा इस पर अगली तिथि 27 नवम्बर दी गई। दूसरी तरफ उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ में माननीय मुख्य न्यायाधीष की अध्यक्षता में गठित खण्डपीठ 21 नवम्बर के पष््चात 22 नवम्बर को एक ऐतिहासिक आदेष करना पड़ा। जिसमें स्पश्ट कहा गया कि कर्मचारियों की लम्बित समस्याओं के निराकरण को लेकर राज्य सरकार क्या कर रही है उसकी समीक्षा स्वंय माननीय मुख्य न्यायाधीष प्रत्येक 15 दिनों में करेगें। न्यायालय ने मंच की चार मांगे क्रमषः लिपिकीय संवर्ग में पदोन्नति हेतु अर्हकारी सेवा की अवधि पूर्णतः समाप्त की जाए तथा लिपिकीय संवर्ग हेतु 18 मार्च, 2011 तथा 22.12.11 को जारी षासनादेषों में पदोन्नति हेतु लगायी गयी बाध्यता समाप्त की जाए। वर्श 2003 से बाधित राजस्व संग्रह अमीन संवर्ग की पदोन्नति व्यवस्था पूर्व की भांति नायब तहसीलदार के पद पर बहाल की जाये। ग्राम पंचायत सफाई कर्मचारियों को प्रधानों से मुक्त किया जाये, सेवा नियमावली बनायी जाये तथा प्रोन्नति के अवसर प्रदान किये जाये तथा सभी राज्य कर्मचारियों को प्रदेष स्थित एसजीपीजीआइ्र, विभिन्न चिकित्सा विष्वद्यालयों/महाविद्यालयों के साथ सम्बद्ध अस्पतालों एवं अन्य विषिश्ट संस्थानों आदि में उ.प्र. सचिवालय के सेवारत/सेवानिवृत्त कार्मिकों की भांति निःषुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाये। चिकित्सा परिचर्या नियमावली में राजकीय चिकित्सालयों से अग्रसारण का प्रतिबंध समाप्त किया जाए। माननीय न्यायालय ने यह भी निर्देष दिया कि यस्मा की कार्यवाही समाप्त की जाए, किसी भी तरह का उत्पीड़न हड़ताल के दौरान नही किया जायेगा। हड़ताल अवधि को अवकाष में बदला जायेगा। श्री आलोक रंजन कृशि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में श्री आनन्द मिश्रा प्रमुख सचिव वित्त, तथा श्री राजीव कुमार , प्रमुख सचिव कार्मिक द्वारा मांग पत्र की सभी मांगों पर निर्णय करेंगे। लखनऊ बेंच मे संगठन की तरफ से श्री उपेन्द्र नाथ मिश्रा एडवोकेट तथा इलाहाबाद बेच से श्री षान्ति नन्दन एडवोकेट अधिकृत किये गये थे।
मा0 उच्च न्यायालयों के उक्त निर्णयों के पष्चात एक वृहद बैठक सायं 6.00 प्रारम्भ हुई जिसमें प्रदेष के सभी संगठनों के प्रदेष अध्यक्ष एवं महामंत्री सम्मिलित हुए। तथा न्यायालय के आदेष की समीक्षा की गयी। तथा मा0 न्यायालय पर पूर्ण विष्वास करते हुए अनिष्चित कालीन महाहड़ताल को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। ग्यारह दिन चली इस ऐतिहासिक महाहड़ताल में सहयोग करने हेतु अधिकार मंच के अध्यक्ष मण्डल के सदस्य श्री अजय सिंह एवं हरि किषोर तिवारी ने आभार व्यक्त किया। बैठक में निम्नवत् संगठनों के पदाधिकारी सम्म्लिित हुए यथा महासचिव मण्डल के सदस्य षिव बरन सिंह यादव, बजरंग बली यादव, वरि0 उपाध्यक्ष मण्डल के भूपेष अवस्थी, राम प्रकाष यादव, उपाध्यक्ष मण्डल के रामेष्वर प्रसाद पाण्डेय, एस0के0 पाण्डेय, गिरीष चन्द मिश्र, महेष चन्द्र सिंह, संचालन समिति के आलोक सिंह, सुरेष रावत, एस0डी0 द्विवेदी, यू0पी0 सिंह, दुर्गेष कुमार, इसके अतिरिक्त मिर्जा फिरोज षाह, एस0पी0 श्रीवास्तव, एल0एन0 सचान, दिवाकर राय, एस0के0 त्रिपाठी, जिला षाखा के बी0एस0 डोलिया, अमिता त्रिपाठी, संजीव गुप्ता सहित तमाम पदाधिकारी उपस्थित रहे।

Chief Justice's Court
Case :- MISC. BENCH No. - 10759 of 2013
Petitioner :- Shambhavi Prakash Tiwari [P.I.L.]
Respondent :- State Of U.P.Through Chief Secretary,Civil Sectt.Lko.&
Ors.
Counsel for Petitioner :- Aishwarya Janhavi Prakash,Moti Lal Yadav
Counsel for Respondent :- C.S.C.
Hon'ble Dr. Dhananjaya Yeshwant Chandrachud,Chief Justice
Hon'ble Ritu Raj Awasthi,J.
In pursuance of the order which was passed by this Court on
21st November, 2013 a meeting was held by the Principal
Secretary, Finance and by the Principal Secretary,
Personnel. The third member of the Committee constituted
by the State Government, namely, Commissioner,
Agriculture Production is on an official visit abroad and,
therefore, was not present. Both the learned Additional
Advocate General and the learned counsel appearing on
behalf of the State Employees Joint Council state before the
Court that the process of dialogue has commenced. A copy
of the minutes of the meeting which was held yesterday has
been placed on the record. The learned Additional Advocate
General has stated on instructions that out of the eight
demands listed in paragraph 4 of the minutes, the demands
at Serial Nos. 3, 4, 6 & 7 do not have serious financial
implications and in principle would be accepted by the
Government. As regards the other demands, the Joint
Council has been requested to reframe the priorities so that
those demands which are of urgent nature can be taken up
for consideration in the initial stage. We would also
commend to the respective parties that the resolution of the
disputes, even if it does not take place immediately on all the
outstanding issues, may proceed step-by-step so that those
demands which are capable of being resolved immediately
can be so resolved to the mutual satisfaction of the
Government and of the concerned Associations. The
learned Additional Advocate General has also pointed out to
the Court that out of the seven Associations which are
recognized under the Rules only two Associations have
proceeded on strike (though this is disputed on behalf of the
joint council).
Be that as it may, it is necessary, as the learned Additional
Advocate General submits, for the State Government to hear
the voices of all the recognized Associations because a
solution which is acceptable to all the recognized
Associations would have to be found. During the course of
the hearing, it has been agreed that though a period of three
months was given to the Committee to submit its report,
parties would desire that the State may apprise the Court
after an interregnum of about 15 days of the further progress
which has been made in the matter. This safeguard has
been sought by the State Employees Joint Council in order
to ensure that the dialogue is taken seriously by the
Government and progresses satisfactorily. The learned
Additional Advocate General has no objection and it has
been accordingly agreed that the petition may now be
placed on board on 3rd December, 2013 so that the Court
may be apprised of the further progress which has been
made in the matter. On this date, the State may place on
record an Action Taken Report setting out what
developments have taken place in the meantime.
On behalf of the State Employees Joint Council, it has been
submitted that having regard to the fact that out of deference
to the intervention of this Court in these proceedings and
since the process of dialogue has been commenced by the
State Government, and more particularly because, in
principle, a decision has been taken to accept four of the
demands, as a gesture of a goodwill the strike is withdrawn
and necessary instructions shall be communicated to all the
Associations and their members immediately. In
consequence it has been stated that all the employees who
are on strike will resume work tomorrow. Further, a prayer
has been made to the effect that once the employees
resume work, the State may consider withdrawing the
directions which have been issued under ESMA and the
period of abstention may be adjusted against the earned
leave. The learned Additional Advocate General has
assured that a sympathetic view would be taken once the
employees return to work and a statement in any event will
be made before the Court by the next date appearing.
We appreciate the fair attitude which has been taken both on
behalf of the State Employees Joint Council as well as on
behalf of the State Government due to the personal
intervention of the learned Additional Advocate General.
We now post the matter for further hearing on 3rd
December, 2013.
We would expect that in the meantime the dialogue which
has already commenced would continue in the same spirit
and commitment so as to resolve all the festering issues.
(Dr. D.Y. Chandrachud,CJ)
(Ritu Raj Awasthi, J.)
Order Date :- 22.11.2013
Santosh/-